Kabhi aisa feel kiya hai jaise aap enough nahi ho? Jaise aapka body standard baaki logon se match nahi karta ho? Aap akelay nahi ho! Bahut se teens aur young adults self-esteem aur body image issues se struggle karte hain. Actually, studies kehti hain ki 35% teens ko body image issues hotay hain. Jab hum TV, movies, aur social media par unrealistic beauty standards dekhte hain, toh aisa feel karna normal hai.Yaad rakho, self-esteem aap aur apne baare mein feel karne se related hai. Yeh apni body ko perceive aur feel karne ka tarika hai. Apni body ke baare mein high self-esteem aur confidence rakhne mein kuch galat nahi hai. Jab aap apne baare mein confident feel karte ho, toh yeh healthier choices aur better relationships ki taraf lead karta hai.Lekin positive self-image ko nurture karna peer pressure ke beech mein mushkil ho sakta hai. Peer pressure ka matlab hota hai doosron ka aap par influence dalna.Jab aapko fit in karna ho, toh peer pressure resist karna difficult ho sakta hai. Lekin yeh yaad rakhein ke aapko har cheez follow karna zaroori nahi hai.Apne aap mein ek beautiful self-image ko train karne ke liye aur peer pressure ko avoid karne ke liye, kuch tips:Apne strengths par focus karein: Har kisi mein strengths hoti hain. Apne strengths likho aur un par kaam karo.Apne saath honest raho: Apne aap ko motivated individuals ke saath rakho. Aise logo ki company mein raho jo aapko uplift karein.Apne body ka khayal rakhein: Healthy meals khayein, acchi neend lein, aur regular exercise karein.Realistic goals set karein: Perfect hone ki koshish mat karo. Aise goals set karo jo achievable hain aur unhe achieve karne ki koshish karo.No kehna seekho: Aise kaamon ko turn down karne se na daro jo aap karna nahi chahte.Ek hobby find karo: Koi aisi hobby rakho jo aap enjoy karte ho, yeh aapke self-esteem aur confidence ko improve karega.Kisi trustable person se baat karo: Agar aap image ya self-esteem issue se fight kar rahe hain, toh kisi par bharosa karein aur unse baat karein - chahe woh parent ho, teacher ho, ya counselor.Yaad rakhein ki aapko love aur acceptance deserve karne ke liye perfect hone ki zaroorat nahi hai. Apne positive self-image ko develop karo aur peer pressure ko handle karo.Aur agar aap ya aapka koi dost udaas, anxious, ya stressed feel kar rahe ho, toh kisi trusted adult jaise parent, teacher, ya counselor se baat karo.Source:- https://www.nationaleatingdisorders.org/
डिमेंशिया के साथ life काफी challenging हो सकती है, लेकिन कुछ तरीके हैं जो डिमेंशिया से suffer कर रहे लोगों को independent बनने में help कर सकते हैं।डिमेंशिया से suffer कर रहे लोगों की मदद करने के 3 Tips:Healthy और Active रहना:Exercise करें, चाहे walk हो या yoga—यह physical और mental health दोनों में improvement लाता है। Balanced diet लें जिसमें fruits, veggies और protein हों, यह brain health को support करता है। Smoking और alcohol से दूर रहें, क्योंकि यह symptoms को और worse कर सकते हैं। Regular health check-up से किसी भी बदलाव को track करना और proper care ensure करना आसान हो जाता है।Mind को busy रखना:Lists या calendars use करें ताकि important tasks याद रहें और stress कम हो। Painting, gardening जैसे hobbies में busy रहें, यह mind को active और mood को boost करता है। Puzzles, games या कुछ नया सीखने से cognitive decline slow हो सकता है। Family, friends या social groups के साथ connected रहने से emotional support मिलता है।Future की Planning करना:Trusted लोगों को nominate करें जो जरूरत पड़ने पर decisions में help कर सकें। अपनी future care की priorities लिख लें ताकि सभी को पता हो कि आप क्या चाहते हैं। बाहर जाते वक्त ID और emergency contact information साथ में रखें ताकि आप safe रहें। Support groups join करने से emotional strength और shared experiences मिलते हैं।भले ही डिमेंशिया का कोई इलाज ना हो, ये tips symptoms को manage करने और जीवन की quality को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं, जिससे independence और well-being बढ़ सकती है।Source:-1.https://www.who.int/news-room/fact-sheets/detail/dementia
Depression दुनिया की सबसे common mental health conditions में से एक है, और ये millions of लोगों को world में affect करती है। कभी-कभी उदासी या low mood होना normal है, लेकिन अगर ये feeling ज्यादा समय तक और overwhelming हो जाए, तो ये आपकी daily life को affect कर सकती है।World Health Organization के estimates के हिसाब से लगभग 280 million लोग दुनिया भर में depression experience करते हैं, जो इसे सबसे common mental health disorders में से एक बनाता है।अगर आप notice कर रहे हो कि आप लंबे समय तक उदास, hopeless, या फिर उन चीज़ों में interest खो रहे हो जो आपको पहले ख़ुशी देती थीं, तो ये depression का sign हो सकता है।Depression और Mood Swings क्या हैं?Depression एक mood disorder है जो आपको उदास, hopeless, या चिड़चिड़ा feel करवाता है। ये आपके thoughts, feelings, और actions को भी affect करता है। Mood swings में आपका mood अचानक बदल सकता है, जहां आप happy से angry या sad feel करने लगते हैं।इसके Signs और Symptoms क्या होते हैं?ये कुछ common signs और symptoms हैं जो depression और mood swings में देखे जाते हैं:हमेशा उदास या hopeless feel करना।उन चीजों का मज़ा न लेना जो पहले आपको पसंद थीं।Appetite या weight में changes।ज्यादा या कम सोना।Fatigue या थकान।खुद को worthless या guilty feel करना।Focus या decision making में मुश्किल।Self-harm या दूसरों को harm करने के thoughts आना।आप Support कैसे ले सकते हैं?अगर आप ऐसा feel कर रहे हैं, तो बिना देरी के अपना experience किसी के साथ share करें। ये family member, friend, teacher, या counselor हो सकते हैं जो आपको मदद और guidance दे सकते हैं।अगर आप या कोई आपका जानने वाला depression या mood swings से suffer कर रहा है, तो नीचे दिए गए tips follow कर सकते हैं:Communicate: किसी trusted adult से बात करें।Professional Help: एक therapist या counselor से बात करें, जो आपको support और strategy provide कर सकता है।Support Group: ऐसे लोगों के साथ conversation share करें जो आपके जैसे ही challenges face कर रहे हैं।Stress manage करें: सही खाना और सोना ज़रूरी है; वो चीजें करें जो आपको ख़ुशी देती हैं।Self-medicate न करें: Depression या mood swings को handle करने के लिए drugs या alcohol से दूर रहें।याद रखें, आप अकेले नहीं हैं। सही मदद और support के साथ आप इन difficult times से निकल सकते हैं और एक healthier और happier life enjoy कर सकते हैं।अगर आप या आपका कोई दोस्त उदास, anxious, या stressed feel कर रहा हो, तो किसी trusted adult जैसे parent, teacher, या counselor से बात करें।Source:- https://www.who.int/news-room/fact-sheets/detail/depression
Dementia. दुनिया भर में 55 million से ज्यादा लोग Dementia से पीड़ित हैं और हर साल लगभग 10 million लोग जुड़ रहे हैं। Dementia आज के समय में deaths का सातवां प्रमुख कारण है।यह एक ऐसी बीमारी है जिसमें लोगों को याद रखने में दिक्कत होती है, अच्छे से सोच पाना हो जाता है और कई बार तो रोजमर्रा के काम भी करना भूल जाते हैं!डिमेंशिया क्या है?Dementia एक ऐसी condition है जिसमें व्यक्ति की mental ability कम होने लगती है । कई कारणों से Dementia हो सकता है, जैसे बढ़ती उम्र, बढ़ा हुआ ब्लड प्रेशर और शुगर, मोटापा, शराब और सिगरेट का सेवन।क्या हम डिमेंशिया को रोक सकते हैं?जी हां, बिल्कुल! कुछ छोटे-छोटे बदलाव से हम Dementia के खतरे को कम कर सकते हैं.Aerobic Exercises: चलना, दौड़ना, या योग करना दिमाग के लिए बहुत अच्छा होता है. ये हमारे दिमाग को स्वस्थ रखने में मदद करता है. यह:Blood flow को बढ़ाता हैं जिससे brain cells nourish होते हैं और blood vessels को damage होने से बचाता हैं ।सूजन को कम करता हैं: सूजन की वजह से कुछ असामान्य proteins (beta-amyloid protein) बनते हैं और व्यायाम इसी सूजन को कम करने में मदद करता है।Adults को लगभग एक सप्ताह में कम से कम 150 से 300 मिनट medium intensity वाली Aerobic Exercises करनी चाहिए।Brain के लिए सही खाना चुनें: कुछ खास चीज़ें होते हैं जो खाने से हमारे brain को healthy रहने में मदद मिलती है। जैसे कि Mediterranean, DASH (Dietary Approaches to Stop Hypertension) and MIND (Mediterranean-DASH Intervention for Neurodegenerative Delay) आहार।फल, सब्जियां, और मछली खाने से हमारा दिमाग तेज रहता है क्योंकि इनमें काफी nutrients होते हैं और Omega 3 fatty acids भी होते हैं जो healthy brain के लिए बहुत जरूरी हैं।अच्छे से सोएं: अच्छे से सोना brain health के लिए काफी महत्वपूर्ण है। जब आप सोते हैं, तो आपका brain खुद को harmful substances से साफ करता है। लेकिन अगर आपको पर्याप्त नींद नहीं मिलती है या रात में अक्सर जागते हैं, तो आपका brain खुद को ठीक से साफ नहीं कर पाता है। इससे समय के साथ परेशानियां हो सकती हैं।क्यों Dementia को रोकना इतना जरूरी है?Dementia एक ऐसी बीमारी है जिसमें व्यक्ति को कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इसलिए, हमें इसे रोकने के लिए हर संभव कोशिश करनी चाहिए। यदि आप अक्सर जागते समय थका हुआ महसूस करते हैं या आपको सोने में परेशानी होती है, तो अपने डॉक्टर से बात करें। वह यह पता लगाने में आपकी मदद कर सकते हैं कि आप अच्छी तरह क्यों नहीं सो पा रहे हैं और वे आपकी नींद में सुधार के कुछ तरीके भी बता सकते हैं।Source:-1. https://www.who.int/news-room/fact-sheets/detail/dementia 2. https://www.health.harvard.edu/mind-and-mood/how-to-lower-your-dementia-risk#:~:text=Aerobic exercise.&text=Another common form%2C vascular dementia,risk of blood vessel damage.
अपने आप को चाहना या पसंद करना या फिर सिर्फ अपने ही बारे में सोचना और या अपने आप को सबसे अच्छा समझना यह आजकल बहुत common हो गया है. हमें यहां पर समझना यह है कि अपने आप को चाहने या पसंद करने में कोई बुराई नहीं है लेकिन जब कोई इस हद तक अपने को पसंद करने लगता है कि उसे बाकी हर कोई अपने से खराब लगने लगे, तो यह सिर्फ अपने आप को पसंद करना नहीं actually एक disorder हैनार्सिसिस्ट पर्सनैलिटी डिसऑर्डर क्या है? जानें इसके प्रमुख लक्षणवह अपनी बहुत self importance feel करते हैं: उन्हें लगता है कि वह सबसे important है और वह दूसरों से बात करके उन पर बहुत एहसान कर रहे हैंवह एक fantasy world में रहते हैं, उन्हें लगता है कि वह सबसे ज्यादा अच्छे हैं, उनके पास सबसे ज्यादा पावर है या वह हर चीज में सबसे बेस्ट हैवह अपने आप को बहुत special और unique समझते हैं और इसीलिए वह आम लोगों से रिश्ता बना कर रखना भी नहीं चाहतेवह बहुत ज्यादा तारीफ के भूखे होते हैं. उनकी जितनी भी तारीफ करें उन्हें कम ही लगती है क्योंकि उन्हें लगता है कि वह इतने अच्छे हैं कि तारीफें भी उनके लिए कम हैवह अपने आप को एक special title देना पसंद करते हैं जैसे कि गुरु, राजा, गुरु मां. जबकि उनमें ऐसी कोई खास बातें नहीं होती बस वह ऐसा महसूस करते हैंवह दूसरों को exploit करते हैं, जैसे दूसरों से जरूर से ज्यादा अपना काम निकलवाना और फिर भी उन्हें value ना करनावह दूसरे की feelings को कुछ value नहीं देते. चाहे उनके सामने कोई रो रहा हो उन्हें कोई फर्क नहीं पड़तावह दूसरों से बहुत jealous feel करते हैं और हमेशा यही दिखाते हैं कि दूसरे उनसे jealous हो रहे हैं क्योंकि वह अपनी कमी कभी accept नहीं कर सकतेवह लोग बहुत घमंडी और attitude वाले होते हैं. वह किसी से सीधे मुंह बात तक करना पसंद नहीं करतेअगर इन नौ में से कोई पांच criteria भी match कर जाएं और उस व्यक्ति की age 18 years से ऊपर हो तो उसे यह disorder होने के chances बहुत ज्यादा हैंइसलिए अगर आपको अपने या अपने किसी में ऐसे कुछ symptoms दिखें तो कृपया psychologist से संपर्क करें. क्यूंकि इसकी वजह से relationships पे बहुत खराब impact पड़ता है.कोई भी इस disorder से बाहर निकल कर अपनी लाइफ वापस balance कर सकता है. So, please किसी की भी help करने से पीछे ना हटेंSource:-1. https://www.health.harvard.edu/blog/biking-and-sex-avoid-the-vicious-cycle-201209145290 2. https://www.betterhealth.vic.gov.au/health/healthyliving/cycling-health-benefits
Migraine एक pulsating सिरदर्द है, जो आमतौर पर medium से severe तीव्रता में देखा जाता है और यह अक्सर जीवन भर रहता है। उपचार न किए जाने पर इसके लक्षण 4 से 72 घंटों तक रहते हैं।Migraine attack में आम तौर पर ऐसा सिरदर्द होता है, जोमध्यम/गंभीर तीव्रता का होसर के एक तरफ या आंखों के पीछे होPulsating प्रभाव का होशारीरिक गतिविधि से बढ़ जाता होLight और sound के प्रति sensitive होसिरदर्द के साथ उल्टी आती होMigraine सिरदर्द के बढ़ने के कारण:इसके कारण हर किसी में अलग हो सकते हैं। 3 मुख्य कर्म में शामिल हैं:Environmental changes:i)मौसम में अचानक बदलावii) बहुत अधिक सो जाना या पर्याप्त नींद न लेनाiii) तेज़ खुशबूiv) तेज़ आवाज़ या तेज़/चमकती रोशनीv) समय पर खाना ना खाना 2. Mental Health concerns:i) हमारी भावनाएँii) तनावiii) अवसादiv) चिंता 3. Medical reasons:i) Motion sicknessii) Low blood sugariii) हार्मोनल changesiv) ) बहुत अधिक परिश्रमMigraine होने की सबसे अधिक संभावना किसे होती है?दुनिया भर में करीब 1.1 billion लोग migraine के सिरदर्द से पीड़ित हैं।Migraine बच्चों और adults दोनों में होता है। लेकिन देखा गया है कि adult महिलाओं को migraine पुरुषों की तुलना में तीन गुना ज्यादा होता हैं। महिलाओं में, migraine अक्सर हार्मोन में बदलाव से संबंधित होता है।Migraine का इलाज:लक्षणों से राहत देना और बहुत ज्यादा attacks को रोकना ही migraine का मुख्य उपचार है। लक्षणों को कम करने के लिए कुछ सुझाव:एक कप कॉफ़ीकिसी शांत, अँधेरे कमरे में आँखें बंद करके झपकी लेना या आराम करनामाथे पर ठंडा कपड़ा/ ice pack रखेंबहुत सारा liquid पीनाMigraine के प्राकृतिक उपचार में विटामिन बी2 (राइबोफ्लेविन), मैग्नीशियम, कोएंजाइम Q10 और एक औषधीय पौधा बटरबर शामिल हैं।Migraine का औषधीय उपचार:Migraine के लिए दो अलग-अलग प्रकार की दवाएं हैं:Acute दवाएँ: दर्द के लक्षण दिखते ही, राहत के लिए ली जाती है।Preventive दवाएँ: भविष्य में होने वाले attacks और उनकी severity को कम करने के लिए प्रतिदिन ली जाती हैं।Lifestyle में बदलाव जो Migraine के हमलों को कम करने या रोकने में मदद कर सकते हैं:व्यायामसिरदर्द करने वाले भोजन/पेय पदार्थों से परहेज करेंनियमित रूप से निर्धारित भोजन करेंपर्याप्त fluids लेंरोजाना अच्छे सेऔर पूरी नींद लेस्वस्थ वजन बनाए रखेंMigraine से पीड़ित प्रत्येक व्यक्ति को सिरदर्द के समय effective treatment की जरूरत होती है। हमारे आसान तरीके आज़माएं और बार-बार होने वाले इस दर्द से छुटकारा पाएं।Source:-1. https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC8904749/ 2. https://www.ninds.nih.gov/health-information/disorders/migraine
क्या आपको पता है कि suicide से मरने वाली females से 3-4 गुना ज़्यादा suicide से मरने वाले males की संख्या है। दुनिया में हर 11 minute में एक इंसान suicide से मरता है। और WHO के मुताबिक़ दुनिया भर के total suicide cases में 70-80% males होते हैं। असल में females males से ज़्यादा suicide attempt करती हैं, लेकिन suicide से मरते ज़्यादा males हैं। ऐसा क्यों है, जानने के लिए पूरा video देखिए, मैं आगे ये भी बताऊंगी।आख़िर males क्यों suicide करते हैं?इसके पीछे हमारा समाज और उसकी सोच है।हमारे society में आदमियों के लिए सदियों से चली आ रही है एक धारणा, "मर्द बनो", "तुम मर्द हो", "तुम्हें बहुत strong होना चाहिए", "मर्द रोते नहीं हैं", और सबसे famous dialogue जो हम सबके favourite Amitabh Bachchan जी का है… बिल्कुल सही समझे हैं…"मर्द को दर्द नहीं होता"।Society के इन सब expectations की वजह से आदमी खुल के बात नहीं कर पाते, किसी से अपनी problem अपना दर्द share नहीं पाते, क्योंकि ऐसे करने से वो मर्द नहीं रहेंगे न… यहाँ तक कि घर में कोई माँ भी अपनी बेटी से ज़्यादा बात करती है अपने बेटे के मुक़ाबले, जिसके कारण उनको अपनी बेटी की problem तो समझ आ जाती है, लेकिन बेटे की problem काफ़ी कम पता चलता है। Actually males को physically strong होने के साथ emotionally strong होने को भी कहा जाता है, जिसके कारण males बहुत कम expressive होते हैं, लेकिन वो भी तो इंसान हैं, उसे भी stress तो होती होगी, रोने का मन करता होगा। ये सब के कारण males में mental problems जैसे depression, anxiety develop होती है और suicide का risk बढ़ जाता है।किन कारणों से males suicide करते हैं?Suicide करने का सबसे common reason relationship issues, heartbreak, financial issues और unemployment यानी बेरोज़गारी और ये सारे problems किसी से share न कर पाना या फिर किसी से support न मिलना पाया गया है।अब बात करते हैं, क्यों suicide से males ज़्यादा मरते हैं?World Health Organisation (WHO) और CDC की report के मुताबिक़, males बहुत जानलेवा तरीके अपनाते हैं suicide करने का। Suicide के death cases में 50% males ने किसी हथियार का use किया है जैसे rifle या gun से ख़ुद को shoot कर लिया हो। इसके पीछे का reason ये है कि males में दर्द सहने की क्षमता ज़्यादा होती है, जिसके कारण वो ऐसा क़दम उठाते हैं कि उनको बचाने का मौक़ा तक नहीं मिलता। इसके अलावा males ख़ुद को फांसी लगा लेते हैं, तो कभी ज़हर खा लेते हैं, या किसी medicine का overdose लेके भी suicide attempt करते हैं।इस video से एक ही message सब तक पहुँचाना चाहती हूँ कि please मर्दों को भी इंसान समझ के उनको support और care दीजिए, उनके emotions की क़दर करें, उनकी problems को सुनें और उनकी help करें। कोई भी इतना strong नहीं होता कि उसे किसी की support की ज़रूरत ही न पड़े।Source:-1. https://www.cdc.gov/suicide/facts/data.html 2. https://www.who.int/data/gho/data/themes/mental-health/suicide-rates
आज के समय में स्कूल के बच्चे भी अपना खुद का मोबाइल फोन लेकर घूम रहे हैं ताकि वह अपने दोस्तों के साथ बात कर सकें और social media account जैसे की facebook, whatsapp, instagram आदि पर active रह सकें। लेकिन याद रखेंलोगों से बातचीत करने के लिए जितने ज्यादा social platforms होंगे उतना ही ज्यादा bully होने का risk होगा। सिर्फ स्कूल के बच्चे ही नहीं, कोई भी इसका निशाना बन सकता है।यह किस प्रकार का bully करने का तरीका है?Digital platforms के उपयोग से किए गए bullying को cyberbullying कहते हैं। Cyberbullying का उद्देश्य होता है किसी को डराना या शर्मिंदा करना।Online कोई कैसे bully कर सकता है?Social media पर target की शर्मनाक photos या videos पोस्ट करकेTarget को अपमानजनक या धमकी वाले messages, photos या videos भेज करTarget के account से दूसरों को गलत messages भेज करCyberbullying स्वास्थ्य स्कूल लंबे समय तक ऐसे प्रभावित करता है:Target हर समय परेशान, शर्मिंदा, डरा हुआ या क्रोधित महसूस कर सकता है। इससे वह मानसिक रूप से प्रभावित होता है।Target को शर्म महसूस हो सकती है या उनकी पसंदीदा चीज़ों में रुचि कम हो सकती है। इससे वह भावनात्मक रूप से प्रभावित होता है।Target को हमेशा थकान महसूस हो सकती है या पेट में दर्द और सिरदर्द का अनुभव हो सकता है। इससे वह शारीरिक रूप से प्रभावित होता है।Cyberbullying मानसिक स्वास्थ्य को कैसे प्रभावित करता है?Cyberbullying का मानसिक स्वास्थ्य पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है। यह व्यक्ति को कुछ ऐसा महसूस करवाता है:शर्मिंदा, घबराया हुआ, चिंतित और असुरक्षितदोस्तों और परिवार से दूरी बना लेने वालाअपने बारे में नकारात्मक विचार रखने वालाउन चीज़ों के लिए दोषी महसूस करना जो उसने कीं या नहीं कींअकेलापन या अभिभूत महसूस करने वालाबार-बार सिरदर्द या पेट में दर्द होनाकाम करने की इच्छा ना होनायह सब मिलकर नकारात्मक भावनाओं और विचारों को कायम रख सकते हैं जो किसी के मानसिक स्वास्थ्य पर गलत प्रभाव डाल सकते हैं।कौन मदद कर सकता ?इस समय target के लिए मदद मांगना बहुत जरूरी है। यह लोग मदद कर सकते हैं:कोई विश्वसनीय adult/ माता-पिता/ परिवार के सदस्यस्कूल में counsellor या sports teacherHelpline numbersसबसे पहली बात, bully करने वाले को ब्लॉक करें और रिपोर्ट करें। सोशल मीडिया कंपनियां सभी को सुरक्षित रखने के लिए responsible हैं।Source:- https://www.unicef.org/end-violence/how-to-stop-cyberbullying
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