प्रेरित प्रसव: कब और क्यों किया जाता है

गर्भावस्था को आमतौर पर एक स्वाभाविक प्रक्रिया के रूप में देखा जाता है, जहाँ प्रसव अपने आप उस समय शुरू होता है जब शिशु जन्म के लिए पूरी तरह तैयार होता है। बहुत सी महिलाओं के साथ ऐसा ही होता है। लेकिन कुछ परिस्थितियों में इंतज़ार करना माँ या शिशु दोनों के लिए सुरक्षित नहीं होता। ऐसे समय में चिकित्सक प्रेरित प्रसव की सलाह देते हैं ताकि किसी गंभीर जोखिम से बचा जा सके।

यह लेख प्रेरित प्रसव को सरल, स्पष्ट और यथार्थ रूप में समझाने का प्रयास करता है। इसमें बताया गया है कि प्रसव को प्रेरित करने की आवश्यकता क्यों पड़ती है, इसके कौन से तरीके होते हैं, महिला को क्या अनुभव हो सकता है और किन बातों पर ध्यान देना आवश्यक होता है।

 

प्रेरित प्रसव का वास्तविक अर्थ क्या है

प्रेरित प्रसव का अर्थ है कि प्रसव को अपने आप शुरू होने की प्रतीक्षा करने के बजाय चिकित्सकीय उपायों द्वारा शुरू किया जाता है। इसके लिए दवाओं या कुछ विशेष प्रक्रियाओं का उपयोग किया जाता है ताकि गर्भाशय में संकुचन शुरू हो और गर्भाशय का मुख खुले, जिससे शिशु का जन्म हो सके।

प्रेरित प्रसव बिना कारण के नहीं किया जाता। चिकित्सक तभी इसकी सलाह देते हैं जब उन्हें लगता है कि गर्भ को और अधिक समय तक बनाए रखना माँ या शिशु के लिए हानिकारक हो सकता है। हालाँकि यह निर्णय भावनात्मक रूप से कठिन हो सकता है, लेकिन कई मामलों में यही सबसे सुरक्षित और ज़िम्मेदार विकल्प होता है।

 

चिकित्सक प्रेरित प्रसव की सलाह क्यों देते हैं

हर गर्भावस्था अलग होती है। कुछ गर्भावस्थाएँ बिना किसी परेशानी के पूरी हो जाती हैं, जबकि कुछ में ऐसी समस्याएँ उत्पन्न हो जाती हैं जिनमें विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है। जब प्रतीक्षा करने से जटिलताओं का खतरा बढ़ने लगता है, तब चिकित्सक प्रेरित प्रसव पर विचार करते हैं।

एक सामान्य कारण तब होता है जब गर्भावस्था अनुमानित प्रसव तिथि से आगे निकल जाती है। लंबे समय तक गर्भ बने रहने पर अपरा ठीक से कार्य नहीं कर पाती, जिससे शिशु को ऑक्सीजन और पोषण की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।

एक अन्य स्थिति तब उत्पन्न होती है जब पानी की थैली फट जाती है लेकिन प्रसव पीड़ा अपने आप शुरू नहीं होती। पानी निकलने के बाद गर्भ में संक्रमण का खतरा धीरे धीरे बढ़ता जाता है। ऐसे में प्रेरित प्रसव कराना आवश्यक हो जाता है।

माँ से जुड़ी कुछ चिकित्सकीय स्थितियाँ भी प्रेरित प्रसव का कारण बन सकती हैं, जैसे गर्भावस्था के दौरान उच्च रक्तचाप, गर्भकालीन मधुमेह, या कोई पुरानी बीमारी जो बिगड़ रही हो। इन परिस्थितियों में प्रसव को देर तक टालना जोखिम भरा हो सकता है।

यदि जाँच के दौरान यह पता चले कि शिशु गर्भ में ठीक से नहीं बढ़ रहा है, या निगरानी में शिशु में तनाव के संकेत दिखाई दें, तो भी प्रेरित प्रसव की आवश्यकता पड़ सकती है। इसके अलावा, यदि पहले किसी गर्भावस्था में शिशु की मृत्यु हो चुकी हो, तो चिकित्सक इस बार प्रसव को पहले कराने की योजना बना सकते हैं।

 

प्रेरित प्रसव से पहले शरीर को कैसे तैयार किया जाता है

प्रसव केवल दर्द शुरू होने तक सीमित नहीं होता। शिशु के जन्म से पहले गर्भाशय का मुख नरम होना, पतला होना और धीरे धीरे खुलना आवश्यक होता है। कई बार यह प्रक्रिया स्वाभाविक रूप से शुरू हो जाती है, लेकिन यदि ऐसा नहीं होता, तो चिकित्सकों को पहले गर्भाशय को तैयार करना पड़ता है।

इस तैयारी को गर्भाशय मुख की तैयारी कहा जाता है। यह चरण बहुत महत्वपूर्ण होता है क्योंकि इससे यह तय होता है कि प्रेरित प्रसव कितना सहज और सफल रहेगा।

 

प्रेरित प्रसव के सामान्य तरीके

हर महिला के लिए एक ही तरीका उपयुक्त नहीं होता। कौन सा तरीका अपनाया जाएगा, यह इस बात पर निर्भर करता है कि गर्भाशय का मुख कितना तैयार है, माँ और शिशु की स्थिति क्या है और गर्भावस्था कितनी आगे बढ़ चुकी है।

पानी की थैली को खोलना

प्रेरित प्रसव का एक सामान्य तरीका पानी की थैली को खोलना होता है। गर्भ में मौजूद यह द्रव शिशु को सुरक्षा प्रदान करता है।

जब गर्भाशय का मुख थोड़ा खुल चुका होता है और शिशु का सिर नीचे की ओर होता है, तब चिकित्सक थैली में छोटा सा छेद कर देते हैं। इससे पानी बाहर निकलता है और अक्सर इसके बाद प्रसव पीड़ा अपने आप शुरू हो जाती है।

यह प्रक्रिया शिशु को नुकसान नहीं पहुँचाती। लेकिन यदि कुछ घंटों में दर्द शुरू न हो, तो गर्भाशय में संकुचन लाने के लिए दवाएँ दी जा सकती हैं, क्योंकि पानी निकलने के बाद देर होने से संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।

 

गर्भाशय को नरम करने की दवाएँ

यदि गर्भाशय का मुख सख्त और बंद हो, तो उसे नरम और पतला करने के लिए विशेष दवाओं का उपयोग किया जाता है। ये दवाएँ गर्भाशय को प्रसव के लिए तैयार करती हैं।

इन दवाओं को योनि के माध्यम से गर्भाशय के पास रखा जाता है। इसके बाद कुछ घंटों तक शिशु की हृदय गति की निगरानी की जाती है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि शिशु सुरक्षित है।

यह चरण अक्सर आगे की प्रक्रिया के लिए आवश्यक होता है। बिना सही तैयारी के प्रेरित प्रसव लंबा और कठिन हो सकता है।

 

संकुचन बढ़ाने वाली दवा

ऑक्सीटोसिन एक हार्मोन है जो शरीर प्राकृतिक रूप से प्रसव के दौरान बनाता है। जब इसे चिकित्सकीय रूप से इस्तेमाल किया जाता है, तो यह नस के माध्यम से दिया जाता है ताकि संकुचन शुरू हो सकें या पहले से मौजूद संकुचन और मजबूत और नियमित हो जाएँ।

इस चरण में, चिकित्सक प्रेरित प्रसव के दौरान शिशु की हृदय गति और संकुचन की तीव्रता दोनों की सावधानीपूर्वक निगरानी करते हैं। इसका उद्देश्य प्रभावी संकुचन उत्पन्न करना है बिना शिशु पर अधिक दबाव डाले।

यदि परीक्षण में यह पता चले कि शिशु को प्लेसेंटा के माध्यम से पर्याप्त ऑक्सीजन या पोषण नहीं मिल रहा है, तो ऑक्सीटोसिन का इंजेक्शन नहीं दिया जाता, क्योंकि मजबूत संकुचन स्थिति को और बिगाड़ सकते हैं।

 

प्रेरित प्रसव का अनुभव कैसा होता है

हर महिला का अनुभव अलग होता है, चाहे प्रसव स्वाभाविक हो या प्रेरित। लेकिन कई महिलाओं को प्रेरित प्रसव में दर्द अधिक तीव्र लग सकता है क्योंकि संकुचन जल्दी और ज़्यादा मजबूत हो सकते हैं।

कुछ महिलाएँ बताती हैं कि प्रेरित प्रसव का दर्द अचानक बढ़ जाता है। इसका अर्थ यह नहीं कि कुछ गलत हो रहा है, बल्कि यह शरीर की दवाओं के प्रति प्रतिक्रिया होती है।

दर्द को नियंत्रित करने के लिए साँस लेने की तकनीकें, शरीर की स्थिति बदलना, गर्म पानी या आवश्यकता होने पर चिकित्सकीय दर्द निवारण के विकल्प उपलब्ध होते हैं।

 

जोखिम और आवश्यक सावधानियाँ

हालाँकि सही कारणों से किया गया प्रेरित प्रसव सामान्यतः सुरक्षित होता है, फिर भी कुछ जोखिम हो सकते हैं।

कभी कभी बहुत तेज़ संकुचन शिशु पर दबाव डाल सकते हैं, इसलिए लगातार निगरानी ज़रूरी होती है। कुछ महिलाओं को दवाओं के कारण सिरदर्द, मतली, उल्टी या बहुत कम मामलों में त्वचा पर चकत्ते हो सकते हैं।

यदि गर्भाशय अपेक्षित रूप से प्रतिक्रिया नहीं करता, तो अन्य चिकित्सकीय हस्तक्षेप या शल्य प्रसव की आवश्यकता पड़ सकती है।

यह भी समझना ज़रूरी है कि प्रेरित प्रसव एक प्रक्रिया है, जो कुछ घंटों से लेकर एक या दो दिन तक चल सकती है। धैर्य और सही चिकित्सकीय देखभाल बहुत महत्वपूर्ण होती है।

 

प्रेरित प्रसव का भावनात्मक प्रभाव

शारीरिक बदलावों के अलावा प्रेरित प्रसव भावनात्मक रूप से भी असर डाल सकता है। कुछ महिलाएँ निराश महसूस करती हैं कि प्रसव स्वाभाविक रूप से शुरू नहीं हुआ। कुछ को चिकित्सकीय प्रक्रियाओं से डर लगता है।

ये सभी भावनाएँ सामान्य हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि माँ और शिशु दोनों सुरक्षित रहें। चिकित्सकों से खुलकर बात करना और परिवार का सहयोग इस समय बहुत सहायक होता है।

 

निष्कर्ष

प्रेरित प्रसव का उद्देश्य बिना वजह हस्तक्षेप करना नहीं होता। यह एक सोच समझकर लिया गया चिकित्सकीय निर्णय होता है, जिसका मकसद जीवन की रक्षा करना और गंभीर जोखिमों को कम करना होता है। हालाँकि यह प्रक्रिया डराने वाली लग सकती है, लेकिन जब महिला को इसके कारण और तरीकों की सही जानकारी होती है, तो वह खुद को अधिक तैयार और आत्मविश्वासी महसूस करती है।

सही निगरानी, अनुभवी चिकित्सकीय देखभाल और जागरूक निर्णय के साथ प्रेरित प्रसव सुरक्षित और प्रभावी रूप से शिशु के जन्म का मार्ग बन सकता है, जब प्रतीक्षा करना बेहतर विकल्प नहीं रह जाता। विस्तृत जानकारी के लिए MedWiki देखें 

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. क्या प्रेरित प्रसव हमेशा पहले से तय होता है?

नहीं। कभी यह पहले से तय होता है और कभी अचानक उत्पन्न हुई जटिलताओं के कारण आवश्यक हो जाता है।

 

2. क्या प्रेरित प्रसव में शल्य प्रसव की संभावना बढ़ जाती है?

कुछ मामलों में हाँ, विशेष रूप से जब गर्भाशय तैयार न हो। फिर भी कई महिलाओं का सामान्य प्रसव सफलतापूर्वक होता है।

 

3. क्या प्रेरित प्रसव से इनकार किया जा सकता है?

हाँ। महिला को प्रश्न पूछने और विकल्प समझने का अधिकार होता है। लेकिन जब जोखिम अधिक हो, तब चिकित्सक इसकी सलाह देते हैं।

 

4. प्रेरित प्रसव में कितना समय लगता है?

यह शरीर की प्रतिक्रिया पर निर्भर करता है। इसमें कुछ घंटे भी लग सकते हैं और कभी एक दिन से अधिक भी।

 

5. क्या प्रेरित प्रसव अधिक दर्दनाक होता है?

कुछ महिलाओं को संकुचन अधिक तेज़ लग सकते हैं, लेकिन दर्द नियंत्रित करने के विकल्प उपलब्ध होते हैं।

 

6. क्या प्रेरित प्रसव शिशु के लिए सुरक्षित है?

सही कारणों और उचित निगरानी के साथ किया गया प्रेरित प्रसव सामान्यतः सुरक्षित होता है।

 

7. क्या प्रेरित प्रसव असफल हो सकता है?

हाँ। यदि प्रसव आगे न बढ़े, तो अन्य चिकित्सकीय उपाय या शल्य प्रसव की आवश्यकता पड़ सकती है।

अस्वीकरण:

यह जानकारी चिकित्सीय सलाह का विकल्प नहीं है. अपने उपचार में कोई भी बदलाव करने से पहले अपने स्वास्थ्य सेवा प्रदाता से परामर्श लें। मेडविकी पर आपने जो कुछ भी देखा या पढ़ा है, उसके आधार पर पेशेवर चिकित्सा सलाह को अनदेखा या विलंब न करें।

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प्रेरणा त्रिवेदी

Published At: Nov 26, 2024

Updated At: Dec 25, 2025