प्रोस्टेट (Prostate) बढ़ने के लक्षण?कई बार हो सकता है कि BPH वाले पुरुषों को कभी पता ही ना चले कि उनका prostate बढ़ गया है, लेकिन अक्सर BPH कुछ परेशानियों के साथ आता है, जैसे:बार-बार पेशाब/ urine आना, खासकर रात मेंकम कम urine निकलना, जैसे कि सिर्फ टपकना या leak होनाurine के दौरान कुछ कठिनाई जैसे शुरू करने या रोकने मेंऐसा महसूस होने कि एक बार में पूरा यूरिन नहीं निकल पाया होकुछ lifestyle changes जो Prostate के लक्षणों को दूर करने में मदद कर सकते हैं:प्रोस्टेट की समस्याओं से राहत पाने के लिए 5 सबसे असरदार जीवनशैली(lifestyle changes) में बदलाव जैसे नियमित व्यायाम, स्वस्थ आहार, वजन नियंत्रित रखना, धूम्रपान छोड़ना और कैफीन व शराब का सेवन कम करना बेहद फायदेमंद हो सकता है।व्यायाम करें: नियमित रूप से व्यायाम और meditation करना। Deep breathing exercises तनाव कम करने में मदद करती हैं। पुरुष जो घबराए हुए और तनावग्रस्त होते हैं, वह अधिक बार यूरिन पास करते हैं।समय लें: जब आप bathroom में हों, तो थोड़ा समय लगाकर पूरी तरह से अपनी urine की नाली को खाली करें। इससे बार-बार urine के लिए जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।Urine टपकने से रोकें: Urine करने के बाद टपकने को कम करने के लिए, एक हाथ की दो या तीन अंगुलियों को अपने scrotum के लगभग एक इंच पीछे रखें और धीरे से ऊपर की ओर दबाएं।अपने डॉक्टर से बात करें: Antihistamines और Decongestants जैसी कुछ दवाओं से urine पर भी प्रभाव पड़ता है। आपका डॉक्टर खुराक का समय बदल सकता है या फिर कोई दूसरी दवा भी लिख सकता है।शाम को liquids पीने से बचें: विशेष रूप से caffeine युक्त और alcoholic liquids से बचें।दवाएं तो हमेशा एक विकल्प होते हैं, लेकिन कुछ आसान lifestyle changes prostate के बढ़ने के लक्षणों को दूर करने में काफी मददगार हो सकते हैं। क्यों न इन्हें आजमाएं?Source:-1.https://www.health.harvard.edu/mens-health/4-tips-for-coping-with-an-enlarged-prostate
मलेरिया एक जानलेवा बीमारी है जो कि संक्रमित मच्छरों (Anopheles mosquitoes) से मनुष्य में फैलती है। हालांकि देखा गया है कि blood transfusion एवं contaminated needles से भी मलेरिया फैल सकता है।मलेरिया के लक्षण: इसके लक्षण आमतौर पर मच्छर के काटने के 10 से 15 दिनों के बाद दिखने शुरू होते हैं। लक्षण साधारण से होकर गंभीर रूप तक कैसे भी हो सकते हैं। साधारण लक्षणों में बुखार, ठंड लगना और सर दर्द आता है जबकि गंभीर लक्षणों में थकान, दौरा पड़ना, भ्रम में रहना, मूत्र का गहरा रंग होना या उसमें खून होना, पीलिया और सांस लेने में कठिनाई होती है।मलेरिया से बचाव के कुछ तरीके: मच्छरों के काटने से बचकर और कुछ दवाओं से मलेरिया को रोका जा सकता है। समय पर उपचार होने से इसकी गंभीरता को रोका जा सकता है। मलेरिया पीड़ित क्षेत्र में जाने से पहले, अपने चिकित्सक से परामर्श करके chemoprophylaxis जैसी दवा ले सकते हैं।मच्छरों के काटने से बचने के लिए ऐसे कपड़े पहने जो आपके शरीर को ज्यादा से ज्यादा ढक सके, सोते समय मच्छरदानी का उपयोग करें, मच्छर भगाने वाली वस्तुओं (repellants) का उपयोग करें (containing DEET, Icaridin or IR3535), मच्छर भगाने वाली coils एवं vaporizer का प्रयोग करें, हर समय अपने घर की जाली की खिड़कियां बंद रखें।मलेरिया के उपचार: मलेरिया से बचाव एवं उपचार के लिए कई दवाओं का उपयोग किया जाता है। किस तरह की दवाई मरीज को देनी है यह एक डॉक्टर निम्न बातों को ध्यान में रखते हुए तय करता है:मलेरिया का प्रकारक्या मलेरिया parasite किसी दवा के प्रति प्रतिरोधी (resistant) हैमरीज का वजन और उम्रक्या मरीज गर्भवती (pregnant) हैकुछ सबसे आम दवाएं:Artemisinin आधारित दवाएं एवं Chloroquine : उपचार में काम आती हैंPrimaquine: संक्रमण को दोबारा न होने देने के प्रति काम करती है(Artemisinin-based combination therapy medicines: Effective in treatment for P. falciparum malaria.Chloroquine: Effective in treatment of infection with the P. vivax parasite only in places where it is still sensitive to this medicine.Primaquine: Is added to the main treatment to prevent relapse of infection with the P. vivax and P. ovale parasites)ज्यादातर दवाइयां गोली के रूप में ही होती है। केवल कुछ ही लोगों को इंजेक्शन के लिए अस्पताल जाने की जरूरत पड़ सकती है।source: https://www.who.int/news-room/fact-sheets/detail/malaria
जैसे कि आपने हमारे पिछले वीडियो में देखा था कि जब भी पानी कहीं भर जाता है तो उसमें मच्छर पनपने लगते हैं जिसकी वजह से कुछ स्वास्थ्य संबंधित परेशानियां खड़ी हो जाती है।इस वीडियो में हम इन्हीं मच्छरों से होने वाली कुछ बीमारियों के बारे में बात करेंगे। यह बीमारियां साधारण रूप से लेकर काफी खतरनाक भी हो सकती हैं।आईए जानते हैं डेंगू के कुछ लक्षण, किस तरह से हम अपने आप को इन बीमारियों से बचा सकते हैं एवं इनके कुछ इलाज।डेंगू एक संक्रमण है जो मच्छरों (Aedes aegypti) के काटने से मनुष्य में फैलता है। ऐसे मच्छर ज्यादातर कहीं ठहरे हुए पानी में ही अंडे देते हैं।डेंगू के लक्षण: बहुत तेज सर दर्द, तेज बुखार (आमतौर पर लगभग 104 degree F), मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द, उल्टी आना, त्वचा पर चकत्ते (rashes) पड़ जाना एवं आंखों के पीछे दर्द होना।डेंगू से बचाव के कुछ तरीके: इस बीमारी का कोई टीकाकरण नहीं है। डेंगू फैलाने वाले मच्छर दिन के समय में सक्रिय (active) होते हैं, इसीलिए ऐसे कपड़े पहने जो आपके शरीर को जितना संभव हो उतना ढक सके, दिन में सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें, मच्छर भगाने वाली वस्तुओं (repellants) का उपयोग करें (containing DEET, Picaridin or IR3535), मच्छर भगाने वाली coils एवं vaporizer का प्रयोग करें, हर समय अपने घर की जाली की खिड़कियां बंद रखें।साथ ही जिन भी चीजों में पानी भरा हो उन्हें हर हफ्ते खाली करके साफ किया जाए, कूड़े को सही जगह फेका जाए, समुदाय में किसी भी तालाब या वस्तु में पानी जमा न होने दे क्योंकि रुके हुए पानी में मच्छर अंडे देते हैं एवं पानी से भरी वस्तुओं में उचित कीटनाशक जरूर लगाए।डेंगू का उपचार: हालांकि डेंगू का कोई उपचार नहीं है, केवल लक्षण संबंधित दवाइयां ही दी जाती हैं। Paracetamol का सेवन ज्यादातर दर्द के लिए किया जाता है। Ibuprofen और Aspirin जैसी दवाइयां नहीं दी जाती क्योंकि यह खून के बहने का खतरा बढ़ा देती हैं। कुछ गंभीर मामलों में अस्पताल में भरती होना जरूरी हो जाता है।Source:- 1. https://www.who.int/news-room/fact-sheets/detail/dengue-and-severe-dengue
2022 में monkeypox outbreak के बाद, World Health Organization (WHO) ने experts को बुलाया है यह decide करने के लिए कि क्या यह spread ज्यादा dangerous है और क्या इसे international emergency declare किया जाना चाहिए, क्योंकि यह 10 से ज्यादा African countries को affect कर चुका है।Monkeypox, जो कि mpox के नाम से भी जाना जाता है, एक viral zoonotic disease है जो animals से humans में spread होती है। यह monkeypox virus के वजह से होता है। Historically, यह Central Africa और West Africa में पाया गया था। Monkeypox का पहला human case एक 9 महीने का baby था जो Democratic Republic of the Congo, Central Africa से था।Monkeypox एक mild illness है जो 2-4 weeks में recover हो सकती है। इसके symptoms हैं: swollen lymph nodes, fever, headache, muscle aches, back pain, fatigue, और एक rash जो pimples और blisters के साथ body के अलग-अलग parts पे appear होती है, including face, palms, और groin area, और यह painful हो सकती है।Monkeypox कई तरीकों से transmit होता है जैसे कि:infected individuals के साथ close contact, जैसे कि kissing, touching, या sexual contactBody fluids, जैसे कि sneezing या coughing सेInfected animals से, especially hunting या cooking के दौरान।Contaminated towels, clothes, या bedding सेऔर Mother से unborn baby को placenta के through भी transmit हो सकता है।Weak immune systems वाले लोग और जो लोग multiple sex partners रखते हैं या sex workers हैं, उनको monkeypox होने का ज्यादा risk होता है।Monkeypox diagnose करने के लिए PCR (Polymerase Chain Reaction) test किया जाता है, जिसमें body fluids या skin से swabs लिए जाते हैं। अगर infected person से contact के 4 दिन के अंदर mpox vaccine लगवा लो, तो disease prevent हो सकती है।Monkeypox को Prevent करने के लिए ये measures ज़रूरी हैं:हाथों को बार-बार soap और water से धोना।Infected individuals से close contact avoid करना।Mask पहनना और surfaces को disinfect किए बिना touch न करना।अगर आपको monkeypox के symptoms लगते हैं, तो doctor से consult करें ताकि complications से बचा जा सके।Source:- 1. https://www.who.int/news-room/fact-sheets/detail/monkeypox 2. https://www.who.int/news-room/fact-sheets/detail/monkeypox
निपाह वायरस की जानकारी1. चमगादड़ से इंसानों में फैलने वाले वायरस:केवल कोरोनावायरस नहीं, निपाह वायरस भी शामिल है।21 जुलाई 2024 को केरल के एक 14 साल के लड़के की निपाह वायरस से मृत्यु हो गई।इस घटना के बाद केरल के स्वास्थ्य मंत्री ने पूरे राज्य में हाई अलर्ट जारी कर दिया है।2. निपाह वायरस का परिचय:निपाह वायरस एक zoonotic वायरस है, जो चमगादड़ या अन्य जानवरों (जैसे पिग्स) से इंसानों में फैलता है।1999 में मलेशिया में सबसे पहले पिग फार्मर्स में देखा गया।इसके बाद सिंगापुर, बांग्लादेश और भारत में भी इसके केस सामने आए।3. फैलने के तरीके:संक्रमित जानवरों के सीधे संपर्क से।फ्रूट-बैट्स के झूठे फलों के सेवन से।संक्रमित व्यक्ति के सीधे संपर्क से।4. लक्षण और संकेत:शुरुआती लक्षण: बुखार, सिरदर्द, गले में खराश, मांसपेशियों में दर्द, उल्टी।बाद में: चक्कर आना, नींद आना, फोकस न कर पाना।गंभीर मामलों में: 24-48 घंटे के अंदर निमोनिया, एक्यूट रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस, एन्सेफलाइटिस (दिमाग में सूजन), और कोमा।5. इन्क्यूबेशन पीरियड और टेस्टिंग:इन्क्यूबेशन पीरियड: 4-14 दिन।टेस्टिंग: RT-PCR (रियल टाइम पॉलीमरेज़ चेन रिएक्शन) या ELISA (एंजाइम लिंक्ड इम्यूनोसॉर्बेंट एसे) से।6. उपचार और रोकथाम:वर्तमान में कोई उपचार या वैक्सीन नहीं है।WHO ने निपाह वायरस को एक प्राथमिकता वाली बीमारी के रूप में पहचाना है।गंभीर मामलों में इंटेंसिव सपोर्टिव केयर की आवश्यकता हो सकती है।रोकथाम के उपाय:पिग फार्म्स को साफ और डिसइंफेक्ट करना।हाथों को साबुन और पानी से धोना।संक्रमित जानवरों की मूवमेंट रोकना।Source:-1. https://www.ncbi.nlm.nih.gov/books/NBK570576/2. https://www.who.int/news-room/fact-sheets/detail/nipah-virus
डेंगू का प्रकोप आजकल बहुत ज्यादा हो गया है और यह हम सबके लिए बहुत ही चिंता का विषय है।डेंगू क्या है?डेंगू एक वायरल इंफेक्शन है जो मच्छरों के काटने से मनुष्य में फैलता है। डेंगू वायरस (Dengue virus) हल्के बुखार से शुरू होता है और कई अन्य परेशानियों का कारण बन सकता है।डेंगू से जुड़े लक्षण:सामान्य लक्षण:बहुत तेज सर दर्दतेज बुखार (आमतौर पर लगभग 104 डिग्री फारेनहाइट)मांसपेशियों और जोड़ों में दर्दउल्टी आनात्वचा पर चकत्ते (rashes) पड़ जानाआंखों के पीछे दर्द होनागंभीर लक्षण: (अक्सर बुखार खत्म होने के बाद आते हैं)पेट में तेज दर्द होनातेजी से सांस लेनामसूड़े, नाक या आंखों से खून आनाथकान और कमजोरी महसूस होनालगातार उल्टियां होनाउल्टी या मल (potty/ stool) में खून आनाबहुत ज्यादा प्यास लगनादूसरी बार संक्रमित होने वाले व्यक्तियों को गंभीर डेंगू का खतरा अधिक होता है।डेंगू का परीक्षण और उपचार:खून की जांच से डेंगू वायरस का पता लगाया जा सकता है। एक बार रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद व्यक्ति को इलाज और देखभाल दोनों की जरूरत होती है। डेंगू का कोई विशेष उपचार नहीं है, केवल लक्षण संबंधित दवाइयां ही दी जाती हैं। दर्द और बुखार के लिए पैरासिटामोल का सेवन किया जाता है। आइबुप्रोफेन और एस्पिरिन जैसी दवाइयों से बचना चाहिए क्योंकि ये खून बहने का खतरा बढ़ा सकती हैं। गंभीर मामलों में अस्पताल में भर्ती होना जरूरी हो सकता है।डेंगू से कैसे बचे:डेंगू का कोई टीकाकरण नहीं है, इसलिए सावधानी बरतना आवश्यक है।डेंगू फैलाने वाले मच्छर दिन के समय सक्रिय होते हैं, इसलिए:ऐसे कपड़े पहनें जो आपके शरीर को जितना संभव हो उतना ढक सकें।दिन में सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें।मच्छर भगाने वाले रैपलेंट्स का उपयोग करें (जिनमें DEET, Picaridin या IR3535 हो)।मच्छर भगाने वाली कॉइल्स और वेपोराइज़र का प्रयोग करें।घर की जाली वाली खिड़कियों का उपयोग करें और उन्हें बंद रखें।इसके साथ:जिन भी चीजों में पानी भरा हो उन्हें हर हफ्ते खाली करके साफ करें।कूड़े को सही जगह पर फेंकें।समुदाय में किसी भी तालाब या वस्तु में पानी जमा न होने दें क्योंकि रुके हुए पानी में मच्छर अंडे देते हैं।पानी से भरी वस्तुओं में उचित कीटनाशक लगाएं।सुरक्षित रहें, स्वस्थ रहें!Source:-1. https://www.who.int/news-room/fact-sheets/detail/dengue-and-severe-dengue2. https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC5524668/
त्रिपुरा के स्कूल और कॉलेजों में 800 से ज्यादा स्टूडेंट्स में HIV पॉजिटिव पाया गया है:इनमें से 47 स्टूडेंट्स की मौत हो चुकी है।रोज़ाना 5-7 नए HIV पॉजिटिव केस सामने आ रहे हैं।यह डेटा 220 स्कूलों और 24 कॉलेजों से लिया गया है।HIV के फैलाव से स्टूडेंट्स बहुत डर गए हैं:कई बच्चे हायर एजुकेशन के लिए दूसरे राज्यों में चले गए हैं।कई HIV पॉजिटिव स्टूडेंट्स भी बाहर पढ़ाई के लिए जा चुके हैं।यह डेटा त्रिपुरा स्टेट एड्स कंट्रोल सोसाइटी (TSACS) ने प्रोवाइड किया है:त्रिपुरा सरकार के अनुसार, यह डेटा 17 साल का रिकॉर्ड है (अप्रैल 2007 से मई 2024 तक)।HIV/AIDS होने का मुख्य कारण:HIV इन्फेक्टेड इंसान से सेक्सुअल कॉन्टैक्ट।पर यह स्टूडेंट्स इंजेक्टेबल ड्रग्स लेते थे।सेम नीडल के इस्तेमाल से HIV फैल गया:HIV वायरस ब्लड के थ्रू ट्रांसमिट होता है और इंफेक्ट करता है।रिसर्च से पता चला है:अधिकतर स्टूडेंट्स के पेरेंट्स गवर्नमेंट जॉब में थे।पेरेंट्स ने बच्चों की ख्वाहिश पूरी करने में ध्यान नहीं दिया कि उनका बच्चा ड्रग्स ले रहा है।त्रिपुरा में अब तक 8,729 एक्टिव HIV केस रजिस्टर हो चुके हैं:इनमें सिर्फ स्टूडेंट्स ही नहीं, बाकी प्रोफेशनल्स भी शामिल हैं।5,674 पेशेंट्स अभी ज़िंदा हैं, जिनमें 4,570 मेल्स, 1,103 फीमेल्स और 1 ट्रांसजेंडर हैं।गवर्नमेंट द्वारा HIV पॉजिटिव पेशेंट्स को फ्री एंटी रेट्रोवायरल ट्रीटमेंट (ART) दी जा रही है:ART में कॉम्बिनेशन ऑफ मेडिसिन्स का यूज़ किया जाता है, जिससे वायरस का ग्रोथ कम हो जाता है।इम्यून सिस्टम को प्रिजर्व करता है, जिससे HIV/AIDS का प्रोग्रेशन कम हो जाता है।काउंसलिंग और रिहैबिलिटेशन भी प्रोवाइड की जा रही है ताकि HIV का ट्रांसमिशन कम हो और सब्सटेंस यूज़ को मैनेज किया जा सके।Source:-1. https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC8000677/2. https://health.tripura.gov.in/aids-control-programme
नमस्कार दोस्तों, आज हम बात करेंगे एक गंभीर इंफेक्शन के बारे में, जिसे "फ्लेश ईटिंग बैक्टीरिया" कहा जाता है। यह इंफेक्शन जापान में जून 2024 तक लगभग 1000 लोगों को प्रभावित कर चुका है और इसे Streptococcal Toxic Shock Syndrome (STSS) भी कहा जाता है।STSS क्या है?STSS एक तरह का इंफेक्शन है जो Group A Streptococcus (GAS) नामक बैक्टीरिया से होता है। ये बैक्टीरिया आमतौर पर गले में पाया जाता है और आमतौर पर स्किन इंफेक्शन या सोर थ्रोट का कारण बनता है। जब यह बैक्टीरिया शरीर के ऐसे हिस्सों में पहुँच जाता है जहाँ आमतौर पर बैक्टीरिया नहीं होते, जैसे कि गहरी मांसपेशियों में या खून में, तो यह STSS का कारण बन सकता है।कौन हो सकता है STSS से प्रभावित?-65 वर्ष से ऊपर के लोग-हाल ही में सर्जरी करवाने वाले व्यक्ति-जिन्होंने हाल ही में चिकनपॉक्स या शिंगल्स का सामना किया हो-डायबिटीज़, खुले घाव या छाले वाले व्यक्ति-नियमित रूप से अल्कोहल का सेवन करने वाले लोग-STSS के लक्षण क्या हैं?-STSS की शुरुआत बुखार, ठंड लगना, रैशेस, मांसपेशियों में दर्द, मिचली और उल्टी से होती है। इसके बाद यह तेजी से बिगड़ सकता है और 24-48 घंटों में ब्लड प्रेशर कम होना, हार्ट रेट बढ़ना और अंगों का फेल होना जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।STSS का इलाज कैसे किया जाता है?STSS का इलाज एंटीबायोटिक्स और इंट्रावेनस फ्लूइड्स के साथ किया जाता है। कभी-कभी, इंफेक्टेड टिश्यू को हटाने के लिए सर्जरी की भी जरूरत पड़ सकती है।दोस्तों, STSS एक गंभीर स्थिति है और इसे इग्नोर करना खतरनाक हो सकता है। अगर आपको या आपके किसी जानने वाले को ये लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत मेडिकल हेल्प लें। और हाँ, हमारे चैनल को सब्सक्राइब करना न भूलें, ताकि आप इस तरह की महत्वपूर्ण जानकारियों से अपडेटेड रहें।Source:-1. Davies H. D. (2001). Flesh-eating disease: A note on necrotizing fasciitis. The Canadian journal of infectious diseases = Journal canadien des maladies infectieuses, 12(3), 136–140. https://doi.org/10.1155/2001/8571952. Dennis L. Stevens, The Flesh-Eating Bacterium: What's Next?, The Journal of Infectious Diseases, Volume 179, Issue Supplement_2, March 1999, Pages S366–S374, https://doi.org/10.1086/513851
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